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Straight talk with former Gen V K Singh

Army Chief V.K.Singh Exclusive Interview With Chauthi Duniya

Anna Hazare In Aap Ki Adalat Part 3

Anna Hazare In Aap Ki Adalat Part 2

Anna Hazare In Aap Ki Adalat Part 1

Patna 30 Jan 2013: Anna Hazare’s ‘Jantrantra’ Rally

अन्ना हजारे की प्रासंगिकता बढ़ गई

कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की पूरी कोशिश है कि अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे आपस में लड़ जाएं. अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे इस तथ्य को कितना समझते हैं, पता नहीं. लेकिन अगर उन्होंने इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया, तो वे सारे लोग जो उनके प्रशंसक हैं, न केवल भ्रमित हो जाएंगे, बल्कि निराश भी हो जाएंगे.

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जनरल वी के सिंह और अन्‍ना हजारे की चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है. इसीलिए उन सवालों पर जिनका रिश्ता जनता से है, सभी दल एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं और आम जनता के हित के खिला़फ खड़े दिखाई दे रहे हैं. जनता से सीधा जुड़ा सवाल भ्रष्टाचार का है.

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हर तरफ अन्ना ही अन्ना

बिहार का शायद ही कोई ऐसा कोना हो, जहां अन्ना हजारे की 30 जनवरी की रैली को लेकर तैयारियां और लोगो का उत्साह चरम पर न हो. लोगों को इंतज़ार है तो बस अन्ना हजारे और जनरल वीके सिंह के पटना पहुंचने का. गांधी मैदान में होने वाली उनकी जनतंत्र रैली से बिहार के लोगों को बहुत सारी उम्मीदें हैं. सूबे के लोगों को इस बात का गर्व है कि भ्रष्टाचार की लड़ाई का शंखनाद करने के लिए अन्ना हजारे ने बिहार की धरती को ही चुना. यही वजह है कि रैली की व्यवस्था में लगे लोग पीछे छूट रहे हैं और जनता खुद पहल कर जनतंत्र रैली की तैयारी में रात दिन जुटी हुई है.

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देश को बचाने का यह आखिरी मौका है

देश का प्रजातंत्र खतरे में है. देश चलाने वालों ने झूठ बोलने, धोखा देने और मर्यादाओं को लांघने को ही राजनीति समझ लिया है. नतीजा यह हुआ कि संसद में नेता झूठ बोलने लगे हैं और सदन में सर्वसम्मति बनाकर जनता के साथ धोखा किया जाने लगा है. सरकार ऐसी-ऐसी नीतियां बना रही है, जिससे सा़फ ज़ाहिर होता है कि संविधान को ही ताक़ पर रख दिया गया है.

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