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Published on March 19, 2013 at 10:37 AM
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Published on at 10:35 AM
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Published on at 10:21 AM
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Published on at 10:18 AM
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Published on at 10:16 AM
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Published on at 10:08 AM
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Published on March 18, 2013 at 6:43 AM
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कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की पूरी कोशिश है कि अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे आपस में लड़ जाएं. अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे इस तथ्य को कितना समझते हैं, पता नहीं. लेकिन अगर उन्होंने इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया, तो वे सारे लोग जो उनके प्रशंसक हैं, न केवल भ्रमित हो जाएंगे, बल्कि निराश भी हो जाएंगे.
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Published on at 6:27 AM
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भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है. इसीलिए उन सवालों पर जिनका रिश्ता जनता से है, सभी दल एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं और आम जनता के हित के खिला़फ खड़े दिखाई दे रहे हैं. जनता से सीधा जुड़ा सवाल भ्रष्टाचार का है.
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Published on March 17, 2013 at 9:04 AM
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बिहार का शायद ही कोई ऐसा कोना हो, जहां अन्ना हजारे की 30 जनवरी की रैली को लेकर तैयारियां और लोगो का उत्साह चरम पर न हो. लोगों को इंतज़ार है तो बस अन्ना हजारे और जनरल वीके सिंह के पटना पहुंचने का. गांधी मैदान में होने वाली उनकी जनतंत्र रैली से बिहार के लोगों को बहुत सारी उम्मीदें हैं. सूबे के लोगों को इस बात का गर्व है कि भ्रष्टाचार की लड़ाई का शंखनाद करने के लिए अन्ना हजारे ने बिहार की धरती को ही चुना. यही वजह है कि रैली की व्यवस्था में लगे लोग पीछे छूट रहे हैं और जनता खुद पहल कर जनतंत्र रैली की तैयारी में रात दिन जुटी हुई है.
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Published on at 9:02 AM
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देश का प्रजातंत्र खतरे में है. देश चलाने वालों ने झूठ बोलने, धोखा देने और मर्यादाओं को लांघने को ही राजनीति समझ लिया है. नतीजा यह हुआ कि संसद में नेता झूठ बोलने लगे हैं और सदन में सर्वसम्मति बनाकर जनता के साथ धोखा किया जाने लगा है. सरकार ऐसी-ऐसी नीतियां बना रही है, जिससे सा़फ ज़ाहिर होता है कि संविधान को ही ताक़ पर रख दिया गया है.
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